SIDH KUNJIKA - AN OVERVIEW

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देवी माहात्म्यं चामुंडेश्वरी मंगलम्

धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥ १२ ॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।

श्री महिषासुर मर्दिनी स्तोत्रम् (अयिगिरि नंदिनि)

नमः कैटभ हारिण्यै, नमस्ते महिषार्दिनि।।

दकारादि श्री दुर्गा सहस्र नाम स्तोत्रम्

देवी माहात्म्यं दुर्गा सप्तशति तृतीयोऽध्यायः

देवी माहात्म्यं दुर्गा सप्तशति त्रयोदशोऽध्यायः

देवी वैभवाश्चर्य अष्टोत्तर शत नाम स्तोत्रम्

धां धीं धू धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।

देवी माहात्म्यं दुर्गा सप्तशति नवमोऽध्यायः

मनचाहा फल पाने के लिए ये पाठ कर रहे हैं तो ब्रह्मचर्य का पालन करें. देवी की पूजा more info में पवित्रता बहुत मायने रखती है.

देवी माहात्म्यं दुर्गा सप्तशति एकादशोऽध्यायः

ग्रहों के अशुभ प्रभाव खत्म हो जाते हैं. धन लाभ, विद्या अर्जन, शत्रु पर विजय, नौकरी में पदोन्नति, अच्छी सेहत, कर्ज से मुक्ति, यश-बल में बढ़ोत्तरी की इच्छा पूर्ण होती है.

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